मौसमक्रिकेटस्पोर्ट्सबॉलीवुडजॉब - एजुकेशनसरकारी योजनाबिजनेसलाइफस्टाइलदेशविदेशटेक्नोलोजीक्रिप्टोकरेंसीगेमिंगराशिफलस्थानीय समाचारलाइफ - साइंससरकारी कार्यआध्यात्मिकअन्य

---Advertisement---

भारत नहीं सौंपेगा शेख हसीना को दो मुख्य कारण जो हिरासत हस्तांतरण नहीं होने देगा।

On: November 18, 2025 7:27 PM
Follow Us:
---Advertisement---

सोमवार को न्यायाधिकरण का फैसला आया जो एकतरफा रहा और अपनी बात रखने का अवसर नहीं हसीना को दिया गया। सरकार ने आधिकारिक घोषणा जारी किया और कोई प्रतिक्रिया नहीं की गई।

राजनीति से संबंधित ज्यादा मामला अपराध से नहीं इसलिए प्रत्यर्पण न करने का युक्ति भारत के लिए और भी कठोर हो जाता है।

मोहम्मद यूनुस अंतरिम सरकार के मुखिया की ओर से किए निवेदन भारत को दिया गया प्रत्यर्पण का लेकिन भारत का रवैया बिल्कुल स्पष्ट है भारत के उपयुक्त नहीं है शेख हसीना को हवाले करना। दीर्घकालीन इतिहास के आधार पर रणनीतिक साथियों की सुरक्षा और सम्मान के लिए जोखिम उठाने में संकोच नहीं रहा। इसी कारण दिसंबर 2024 में सरकारी मांग आने के बाद ढाका से भारत हसीना को संरक्षण में रखे हुए है। सरकार ने सोमवार को प्रशासनिक बयान जारी किया। रोचक बात यह है कि असंतुलित फैसला सुना दिया और अपनी बात रखने का अवसर नहीं मिला हसीना को।

राजनीतिक जैसा दिखाई देता है चूंकि मामला यह पूरा इसलिए प्रत्यर्पण न करने का निर्णय मजबूत बनाता है भारत का।

2013 में प्रत्यर्पण समझौता पर हस्ताक्षर बांग्लादेश ने भारत के साथ किया था। जिसे दुबारा परिवर्तित किया गया 2016 में। इसी समझौते के अनुरूप शेख मुजीबुर रहमान की हत्या के दो आरोपी व्यक्तियों को सौंपा था भारत ने 2020 में बांग्लादेश को। अनुसार संधि के प्रत्यर्पण संभव है उसी हालत में जब अपराध दोनों देशों में आरोपित हो अपराधी की। गिरफ्तारी वारंट जारी हो अपराधी के खिलाफ। प्रार्थना को आंख बंद करके कबूल नहीं कर सकता भारत।

दो ठोस कानूनी आधार उपलब्ध हैं, इसी कारण हसीना का प्रत्यर्पण भारत नहीं कर सकता है।

पहला आधार जुड़े हुए राजनीतिक अपराध से व्यवस्था का है अनुच्छेद 6 के मुताबिक संधि के मामला राजनीतिक माना गया हो तो प्रत्यर्पण से कर सकता है अस्वीकार भारत। हालांकि मानवता के प्रति अपराध, हत्या और नरसंहार इस अपवाद में शामिल नहीं है। चूंकि हसीना को ICT ने जघन्य अपराधों का दोषी बताया है, इसलिए यह तर्क नहीं कर सकता भारत सीधे कि केवल राजनीतिक पूरा मामला है। दूसरा आधार कमी के कारण जुड़ा है निष्पक्ष सुनवाई के अनुच्छेद 8 के तहत खतरा हो संदिग्ध की जान की और न्यायाधिकरण का मूल भावना राजनीतिक प्रभाव हो बल्कि न्याय नहीं तो इनकार कर सकता भारत प्रत्यर्पण से। पर्याप्त तर्क हैं भारत के पास।















Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

और पढ़ें

पीएम मोदी ने कहा भारत हमेशा आंतरराष्ट्रीय संकटों में पहले उत्तर देने वाला देश हैं।

2025 में 10 सबसे शक्तिशाली व्यक्तियों की सूची विश्व के?

क्या नया महामारी आ रहा है? जापान ने घोषित किया राष्ट्रीय फ्लू प्रकोप, 4000 से अधिक लोग अस्पताल में भर्ती!

बेंजामिन नेतन्याह ने गाजा योजना पर पीएम मोदी से बात करने के लिए सुरक्षा कैबिनेट की बैठक रोकी |

निर्वासित गाज़ा फ़्लोटिला कार्यकर्ताओं का कहना है।”‘हमें जानवरों की तरह बर्ताव किया गया’,

ड्रम्स, बाइक्स और कंज़र्वेटिज़्म: जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री का उदय” यह कहानी जापान की राजनीति में महिलाओं के लिए एक नया अध्याय खोलने वाली सफलता की हो सकती है।

Leave a Comment